Class 5 Hindi Nyay Question Answer
कक्षा 5 हिंदी पाठ 9 प्रश्न उत्तर – Class 5 Hindi Chapter 9 Nyay Question Answer
बातचीत के लिए
प्रश्न 1.
जब शाम होती है तो आपको प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन दिखाई देते हैं ?
उत्तर:
जब शाम होती है तो प्रकृति में अनेक परिवर्तन दिखाई देते हैं, जैसे- धूप कम हो जाती है, छाया बढ़ जाती है, ठंडी हवा चलने लगती है, वातावरण शांत हो जाता है, पक्षी अपने घोंसलों में लौटने लगते हैं।
(विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर बता सकते हैं ।)
प्रश्न 2.
क्या आपने कभी किसी पशु-पक्षी को बचाया है? उनसे जुड़ा कोई अनुभव साझा कीजिए ।
उत्तर:
हाँ, हमने भी पशु-पक्षी को बचाया है। एक बार एक घायल कबूतर मेरी बालकनी में आ गिरा था। मैंने उसे उठाकर उसका घाव साफ़ किया, उसे पानी व खाने की वस्तु दी। डॉक्टर से पूछकर मैंने उसे दवाई भी दी। कुछ दिन सेवा करने के बाद वह उड़ने लगा ।
(विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर बता सकते हैं ।)
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प्रश्न 3.
यदि आप मंत्री के स्थान पर होते तो न्याय कैसे करते ?
उत्तर:
यदि मैं मंत्री के स्थान पर होता, तो सबसे पहले दोनों का पक्ष सुनता तथा इस बात पर निर्णय लेता कि मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। सिद्धार्थ ने निर्दोष हंस के प्राणों की रक्षा की थी, इसलिए मैं हंस उसे दे देता। (विद्यार्थी अपने विचार भी दे सकते हैं ।)
प्रश्न 4.
इस नाटक में सभी पात्र पुरुष हैं। यदि किन्हीं दो पात्रों को महिला पात्र के रूप में प्रस्तुत करना हो तो आप किन्हें बदलकर प्रस्तुत करना चाहेंगे और क्यों ?
उत्तर:
इस नाटक में हमें यदि किन्हीं दो पात्रों को महिला पात्र के रूप में प्रस्तुत करना हो, तो हम राजा के स्थान पर रानी व पुरुष मंत्री के स्थान पर महिला मंत्री बनाना चाहेंगे। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हम चाहते हैं कि समाज को यह संदेश मिले कि महिलाएँ भी देश / राज्य कुशल तरीके से चला सकती हैं तथा उचित न्याय कर सकती हैं।
(विद्यार्थी अन्य उत्तर भी लिख सकते हैं ।)
सोचिए और लिखिए
प्रश्न 1.
हंस को घायल देखकर सिद्धार्थ ने क्या किया?
उत्तर:
हंस को घायल देखकर सिद्धार्थ ने उसे गोद में उठाकर स्नेहपूर्वक उसके शरीर में लगा तीर निकाला, उसके शरीर पर प्रेमपूर्वक हाथ फेरा, उसकी देखभाल की और उसे बचाने का प्रयास किया।
प्रश्न 2.
अंततः हंस सिद्धार्थ को ही क्यों मिला?
उत्तर:
अंततः हंस सिद्धार्थ को इसलिए मिला क्योंकि उसने घायल हंस पर दया और करुणा दिखाकर उसकी देखभाल की तथा उसके प्राणों की रक्षा की। ‘मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है’ यह कथन सिद्धार्थ की हंस के प्रति सहृदयता को दर्शाता है। उसकी दयालुता के कारण ही हंस बच गया था। अतः सत्य और न्याय के कारण हंस सिद्धार्थ को मिला।
प्रश्न 3.
कहानी को अपने ढंग से प्रवाह चार्ट के रूप में लिखिए-

उत्तर:
सिद्धार्थ व उसके सखा का प्रकृति को निहारना ।
↓
तीर लगे पक्षी का घायल होकर गिरना ।
↓
सिद्धार्थ द्वारा घायल हंस को देखना और उसकी मदद करना।
↓
सिद्धार्थ का घायल हंस के शरीर से तीर निकालना और मित्र द्वारा राजवैद्य से मरहम मँगवाना ।
↓
सिद्धार्थ और देवदत्त के बीच हंस को लेकर विवाद होना जिसके समाधान के लिए मित्र द्वारा महाराज की शरण में जाने के लिए कहना ।
↓
देवदत्त का महाराज के पास जाकर न्याय की माँग करना।
↓
राजदरबार में सिद्धार्थ का अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठना और ‘मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है’ इस संदर्भ में न्याय की माँग करना।
↓
मंत्री की सलाह पर महाराज द्वारा सत्य और न्याय का पक्ष लेते हुए हंस सिद्धार्थ को दे देना।
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अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1.
जिस समय आकाश में हंस को तीर लगा उस समय उसके अन्य साथियों ने आपस में क्या बातें की होंगी?
उत्तर:
जिस समय आकाश में हंस को तीर लगा उस समय उसके अन्य साथी आपस में इस प्रकार की बातें कर रहे होंगे-
- “हमें जल्दी से भागना चाहिए, वरना अगला तीर हमें भी लग सकता है।”
- ‘हमारा साथी घायल हो गया, काश हम कुछ कर पाते !”
- “किस निर्दयी ने यह तीर चलाया और हमारे साथी को घायल कर दिया ।”
- “देखो, वह एक दयालु लड़के के पास गिरा है, शायद वह उसकी मदद करेगा।”
- “काश, कोई उसे बचा ले !”
प्रश्न 2.
हंस देवदत्त के पास उड़कर क्यों नहीं गया?
उत्तर:
सभा में हंस देवदत्त के पास उड़कर इसलिए नहीं गया क्योंकि देवदत्त ने ही उस पर तीर चलाया था, जिससे वह घायल हो गया था। हंस डर गया था और उसे यह भी महसूस हुआ कि देवदत्त ने उसे मारने की कोशिश की है। इसके विपरीत, सिद्धार्थ ने उसकी जान बचाई, उसकी देखभाल की और उसे प्रेम और दया दी। इसलिए हंस को सिद्धार्थ के पास सुरक्षा और अपनापन महसूस हुआ।
प्रश्न 3.
राजा शुद्धोदन ने निर्णय के बाद सिद्धार्थ से क्या कहा होगा ?
उत्तर:
“बेटा सिद्धार्थ, तुमने करुणा, दया और जीवों के प्रति प्रेम का जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह वास्तव में महान है। आज तुमने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा बल हिंसा में नहीं, बल्कि करुणा में होता है। मुझे तुम पर गर्व है। मैं आशा करता हूँ कि आगे भी तुम इसी प्रकार न्याय और दया का मार्ग अपनाओगे ।”
प्रश्न 4.
एक रात सिद्धार्थ मीठी नींद सो रहे हैं। उनके सपने में हंस आता है और सिद्धार्थ के साथ न्याय वाले दिन का अपना अनुभव सुनाता है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि हंस ने सिद्धार्थ से क्या-क्या बातें की होंगी?

उत्तर:
हंस – “ सिद्धार्थ ! मुझे वह दिन आज भी याद है जब तीर लगने पर मैं घायल होकर तुम्हारे पास गिरा था। दर्द से तड़प रहा था, लेकिन तुम्हारी कोमल हथेलियों ने मुझे शांति दी।
तुमने मेरी मरहम-पट्टी की, मुझे जल दिया और सबसे बड़ी बात मुझे जीवन दिया।
सभा में जब मुझे बुलाया गया, मैं डरा हुआ था, पर तुम्हारे पास लौटकर मुझे फिर से सुरक्षा और अपनापन मिला। तुम्हारी करुणा ने मुझे सिखाया कि सच्चा वीर वह होता है जो बचाता है, न कि जो घायल करता है।
मैं आज भी तुम्हारा आभार मानता हूँ। जब भी आकाश में उड़ता हूँ, तुम्हारा चेहरा याद आता है – करुणा और प्रेम से भरा हुआ ।”
सिद्धार्थ – ” प्रिय हंस, मैंने तुम्हारे लिए जो किया, वह मेरा कर्तव्य था। हर प्राणी को जीने का अधिकार है-चाहे वह पक्षी हो या मनुष्य । मैं नहीं चाहता कि कोई भी जीव बिना दोष के कष्ट पाए।
तुम्हें बचाकर मैंने किसी पर उपकार नहीं किया, बल्कि उस दिन मैंने सीखा कि करुणा ही सच्चा धर्म है। तुम्हारे प्राण बचाकर मैंने अपने भीतर की करुणा को पहचाना। आज तुम स्वस्थ और आज़ाद होकर उड़ रहे हो-यही मेरी सबसे बड़ी खुशी है ।”
भाषा की बात
प्रश्न 1.
पाठ में हंस और हँस शब्द आए हैं। हंस में अनुस्वार
का प्रयोग हुआ है और हँस में चंद्रबिंदु
का प्रयोग हुआ है। अब आप इस पाठ में आए अनुस्वार एवं चंद्रबिंदु वाले शब्दों को खोजिए और अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए। उनका वाक्यों में भी प्रयोग कीजिए ।
उत्तर:
रँभाने, हाँ, पूछूंगा, सुंदर, माँ, आँखें, साँस, परंतु, शांत, मंत्री, मंच, ऊँचा, यहाँ, गंभीर
- गाँव में गाय के रँभाने के स्वर आज भी सुनाई देते हैं।
- वह हंस बहुत सुंदर था ।
(इस प्रकार दिए गए शब्दों से विद्यार्थी अन्य वाक्य स्वयं बना सकते हैं।)
प्रश्न 2.
रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ वाले शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ।
(क) सूर्य का उदय पूर्व दिशा में और अस्त पश्चिम दिशा में होता है।
(ख) उसने मारा है परंतु मैंने ……… है।
(ग) इस निर्दोष पक्षी को मारने वाला ………. है।
(घ) इस जटिल समस्या का हल बहुत ………. है।
उत्तर:
(क) सूर्य का उदय पूर्व दिशा में और अस्त पश्चिम दिशा में होता है।
ख) उसने मारा है परंतु मैंने बचाया है।
(ग) इस निर्दोष पक्षी को मारने वाला दोषी है।
(घ) इस जटिल समस्या का हल बहुत सरल है।
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प्रश्न 3.
नीचे दिए गए चित्रों और शब्दों को जोड़कर मुहावरे / लोकोक्ति बनाइए । अपनी रुचि के किन्हीं पाँच मुहावरों और लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

उत्तर:

(क) मगरमच्छ के आँसू बहाना ।
(ख) आँख मिचौनी खेलना।
(ग) एक और एक ग्यारह ।
(घ) अक्ल बड़ी या भैंस
(ङ) बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद !
(च) नौ-दो ग्यारह होना ।
(छ) लाल-पीला होना ।
(ज) दाँतों तले उँगली दबाना ।
(झ) पेट में चूहे दौड़ना ।
(ञ) सूरज को दीया दिखाना ।
वाक्य प्रयोग
(क) सौरभ ने अपनी गलती छुपाने के लिए मगरमच्छ के आँसू बहाए ।
(ख) आज सुबह से ही मौसम आँख मिचौनी खेल रहा है।
(ग) हम दोनों मिलकर इस काम को अवश्य कर लेंगे। वो कहते हैं न- एक और एक ग्यारह होते हैं।
(घ) केवल ताकत से काम नहीं चलता, सोच-समझ भी ज़रूरी है- आखिरकार अक्ल बड़ी या भैंस !
(ङ) राधिका ने अनमोल चित्र को रद्दी समझकर फेंक दिया, सही बात है – बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद ।
(च) पुलिस को देखकर चोर नौ-दो ग्यारह हो गया ।
(छ) राघव की झूठी बातें सुनकर पिता जी लाल-पीले हो गए ।
(ज) ताजमहल की सुंदरता देखकर लोग दाँतों तले उँगली दबाने लगे।
(झ) स्कूल से आते ही भूख के कारण मानस के पेट में चूहे दौड़ने लगे।
(ञ) अभय जैसे वैज्ञानिक को छोटे-छोटे वैज्ञानिक प्रयोग दिखाना सूरज को दीया दिखाने के समान है।
(विद्यार्थी स्वयं भी दिए गए मुहावरे / लोकोक्तियों का वाक्यों में प्रयोग कर सकते हैं ।)
पाठ से आगे
प्रश्न 1.
‘हंस वाली घटना के बाद सिद्धार्थ, देवदत्त को एक संदेश देना चाहते हैं। आपके अनुसार सिद्धार्थ ने देवदत्त को क्या संदेश लिखकर भेजा होगा-

उत्तर:
प्रिय भाई देवदत्त
तुमने जिस हंस पर निशाना साधकर उसे घायल किया था, वह हंस अब बिलकुल ठीक-ठाक है। मरहम द्वारा उसका घाव ठीक हो गया। मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि प्राणियों की रक्षा करना मानवता का धर्म है। मनुष्य होने के नाते हम दूसरों के दुख को समझें चाहे वह इनसान हो या कोई जीव-जंतु । हर जीव का जीवन मूल्यवान है। जो प्राणियों की रक्षा करता है, वह न केवल दयालु है बल्कि सच्चा मानव भी है। जिस समाज में निर्दोष, असहाय प्राणियों की रक्षा होती है, वही समाज वास्तव में मानवता के मार्ग पर चलता है। अत: हमें सभी प्राणियों के प्रति दया, सहानुभूति, प्रेम आदि भावों को रखना चाहिए। आशा करता हूँ कि तुम एक दिन यह अवश्य समझ पाओगे कि न्याय केवल अधिकार नहीं, कर्तव्य और संवेदना का नाम है।
आपका भाई
सिद्धार्थ
प्रश्न 2.
बगीचे में सुंदर-सुंदर गुलाब के फूल लगे हैं। प्रमोद को ये फूल बहुत सुंदर लगते हैं। वह उन फूलों को तोड़कर अपने पास रख लेता है। करुणा को भी फूल बहुत पसंद हैं। वह प्रतिदिन फूलों को खाद-पानी देकर उनकी देखभाल करने का निर्णय लेती है। आप इन फूलों से अपना प्रेम कैसे दर्शाएँगे एवं क्यों ? अपनी कक्षा के साथियों के साथ चर्चा कर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए ।

उत्तर:
हम फूलों के प्रति प्रेम दर्शाने के लिए उनकी सेवा करेंगे। उनमें खाद-पानी डालेंगे । उनको आवश्यकता के अनुरूप धूप दिखाएँगे। लोगों को उन्हें न तोड़ने के लिए कहेंगे।
(विद्यार्थी कक्षा के साथियों के साथ चर्चा करके स्वयं करेंगे।)
प्रश्न 3.
कुछ पक्षियों की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। कई पक्षी तो ऐसे हैं जो विलुप्त होने की स्थिति में आ गए हैं, उदाहरण के लिए गौरैया। चित्रों के माध्यम से नीचे कुछ ऐसे संकेत दिए गए हैं जो पक्षियों की दिन-प्रतिदिन कम होती संख्या के लिए उत्तरदायी हैं। चित्रों को देखकर अपने सहपाठियों के साथ इन कारणों पर चर्चा कीजिए। यह भी पता लगाइए कि पक्षियों के बचाव और उनकी संख्या में वृद्धि के लिए कैसे योगदान दे सकते हैं।

उत्तर:
- पतंग के माँझे से पक्षियों को चोट लग जाती है। वे घायल हो जाते हैं। कभी-कभी गंभीर चोट के कारण वे मर भी जाते हैं।
- पेड़-पौधे, पक्षियों का प्राकृतिक घर होते हैं। आजकल पेड़-पौधों के कटने के कारण पक्षियों के आवास स्थल नष्ट हो जाते हैं। उनको रहने के लिए घोंसला बनाने का स्थान नहीं मिल पाता है।
- कारखानों और फ़ैक्टरियों के कारण वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण तथा जल प्रदूषण होता है। इसके कारण तेज़ शोर और प्रदूषण से पक्षी ऐसे इलाके को छोड़ देते हैं या बीमार हो जाते हैं।
- मोबाइल टावर/संचार टावर की विकिरण (रेडिएशन), इलेक्ट्रॉनिक विकिरण या विद्युत चुंबकीय तरंगें पक्षियों की मार्गदर्शन शक्ति को प्रभावित करती हैं, जिससे वे उड़ने की दिशा भूल जाते हैं। लगातार आने वाली विकिरण के कारण पक्षी अपने घोंसले छोड़ देते हैं। वे अंडे नहीं दे पाते हैं और बच्चों की देखभाल नहीं कर पाते हैं।
पक्षियों के बचाव और उनकी संख्या में वृद्धि के लिए हम निम्न प्रकार से योगदान दे सकते हैं-
- पतंग उड़ाने के लिए धारदार माँझे का प्रयोग न करना ।
- ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करना ।
- पक्षियों को घोंसले बनाने के लिए सुरक्षित स्थान देना ।
- पेड़ों की कटाई रोकना तथा वृक्षारोपण करना।
- प्लास्टिक और रसायनों का कम उपयोग करना।
(विद्यार्थी अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करें और लिखें।)
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मैं भी सिद्धार्थ
प्रश्न 1.
नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं जो सहायता, समझदारी और करुणा से संबंधित हैं। कक्षा में अपने समूह में इन पर संवाद कीजिए एवं किसी एक चित्र पर कुछ पंक्तियाँ भी लिखिए।

(विद्यार्थी चित्रों के लिए पुस्तक के पृष्ठ – 115 पर देखें ।)
दिए गए चित्रों पर विद्यार्थी कक्षा में समूह बनाकर संवाद करेंगे।
उत्तर:
चित्र 1 में गरमियों में घर की छत की मुँडेर पर पक्षियों के लिए एक पात्र में पानी भरकर रखा है। ऐसा करने से पक्षियों को पीने के लिए पानी मिल जाता है, जिससे उसकी जान बचती है। तेज गरमी में जब नदियों, तालाबों और गड्ढों में पानी सूख जाता है तब पक्षियों के पास पानी की कमी हो जाती है, वे प्यास से तड़पते हैं, यहाँ तक कि मर भी जाते हैं। ऐसे में पक्षियों के लिए पानी भरकर रखना एक छोटा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण और करुणामय कार्य है। यह कार्य हमें संवेदनशील और ज़िम्मेदार बनाता है।
प्रश्न 2.
नाटक के प्रथम दृश्य में सिद्धार्थ और उनका सखा राज उद्यान के सौंदर्य का देख-सुनकर आनंद ले रहे हैं। यदि उनका कोई सखा देखने-सुनने में असमर्थ होता तो सिद्धार्थ उसे इस आनंद का अनुभव कैसे करवाते ? कक्षा में चर्चा कीजिए ।
उत्तर:
यदि सिद्धार्थ का कोई सखा देखने-सुनने में असमर्थ होता तो सिद्धार्थ उसे उद्यान के सौंदर्य के आनंद का अनुभव निम्न प्रकार से करवाते-
- स्पर्श के माध्यम से वे फूल की कोमल पंखुड़ियाँ तथा ठंडी घास, उसके हाथों से स्पर्श (छुआ) कर उसे महसूस करवाते।
- सुगंध के माध्यम से – रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू को उसकी नाक के माध्यम से सुँघाकर उसकी इंद्रियों को जगाते।
- कल्पना के माध्यम से – शब्दों के द्वारा बहुत सुंदर वर्णन करते, जिसके कि सखा अपने मन में चित्र बना सके।
मेरा पक्षी
अपने अभिभावक और शिक्षक की सहायता से निम्न चित्रों को देखते हुए अपने लिए कागज का एक पक्षी बनाइए-
