NCERT Class 8th Hindi Chapter 5 कबीर के दोहे Question Answer
कबीर के दोहे Class 8 Question Answer
कक्षा 8 हिंदी पाठ 5 प्रश्न उत्तर – Class 8 Hindi कबीर के दोहे Question Answer
पाठ से प्रश्न-अभ्यास
(पृष्ठ 64-71)
आइए, अब हम इन दोहों को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
प्रश्न 1.
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय । बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय ।। “इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है ?
- श्रम का महत्व
- ज्ञान का महत्व
- गुरु का महत्व
- भक्ति का महत्व
उत्तर:
- गुरु का महत्व
प्रश्न 2.
“अति का भला न बोलना अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना अति की भली न धूप । “इस दोहे का मूल संदेश क्या है?
- हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है
- बारिश और धूप से बचना चाहिए
- हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है
- हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए
उत्तर:
- हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है
प्रश्न 3.
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं फल लागै अति दूर ।। ” यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है ?
- समय का सदुपयोग करना
- दूसरों के काम आना
- परिश्रम और लगन से काम करना
- सभी के प्रति उदार रहना
उत्तर:
- दूसरों के काम आना
- सभी के प्रति उदार रहना
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प्रश्न 4.
“ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै आपहुँ सीतल होय ।। “इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
- लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं
- दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है
- किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है
- सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है
उत्तर:
- दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है
प्रश्न 5.
“साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप । जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप।। “इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
- सत्य और झूठ में कोई अंतर नहीं होता है
- सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है
- बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं
- सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है
उत्तर:
- सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है
प्रश्न 6.
“निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय । बिन पानी साबुन बिना निर्मल करै सुभाय ।। “यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है ?
- आलोचना से बचना चाहिए
- आलोचकों को दूर रखना चाहिए
- आलोचकों को पास रखना चाहिए
- आलोचकों की निंदा करनी चाहिए
उत्तर:
- आलोचकों को पास रखना चाहिए
प्रश्न 7.
“साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय । सार-सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाय ।। ” इस दोहे में ‘सूप’ किसका प्रतीक है?
- मन की कल्पनाओं का
- सुख-सुविधाओं का
- विवेक और सूझबूझ का
- कठोर और क्रोधी स्वभाव का
उत्तर:
- विवेक और सूझबूझ का
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर:
मेरा मानना है कि कबीर जी के सभी दोहे उच्च जीवन-मूल्यों पर आधारित है। जैसे-
- सत्य हमारे हृदय को प्रकाशित करता है ।
- गुरु ईश्वर से भी श्रेष्ठ हैं क्योंकि वे ही हमें ईश्वर से मिलवाते हैं।
- हमें उदार बनने के साथ-साथ अपने जीवन में संतुलित भी रहना चाहिए ।
- मीठी वाणी का प्रयोग करना चाहिए। अपनी निंदा सुनकर अपने अवगुणों को दूर करना चाहिए |
- मन को नियंत्रित करके सत्संगति को अपनाना चाहिए।
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।


उत्तर:
1. 3
2. 5
3. 6
4. 8
5. 7
6. 4
7. 1
8. 2
(ख) नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए –

उत्तर:
1. 8
2. 6
3. 2
4. 1
5. 4
6. 7
7. 5
8. 3
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पंक्तियों पर चर्चा
प्रश्न- पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए । आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-

(क) “ कबिरा मन पंछी भया भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय ।।”
(ख) “साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप ।
जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आप। ।”
उत्तर:
(क) कवि कहते हैं कि मन एक चंचल पक्षी के समान होता है। इसे जहाँ अच्छा लगता है, वहीं चला जाता है। लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि जैसी हमारी संगति होती है, वैसा ही हमारे जीवन पर उसका प्रभाव पड़ता है। इसलिए हमें सत्संगति में रहना चाहिए |
(ख) कबीर जी कहते हैं कि सत्य के बराबर कोई तप नहीं हैं क्योंकि सत्य का पालन करना कठिन कार्य है तथा झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं है। जिसके हृदय में सत्य है उसी के हृदय में स्वयं ईश्वर विराजते हैं।
सोच-विचार के लिए
प्रश्न- पाठ को पुनः ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय।” इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
(ख) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर ।” इस
दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन – कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए ।
(ग) “ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय।” क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।
(घ) “जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय।।” हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है ? उदाहरण सहित बताइए ।
उत्तर:
(क) जी, हाँ। मैं इससे सहमत हूँ क्योंकि गुरु ने अपने ज्ञान से ही हमें ईश्वर तक पहुँचने का रास्ता बताया है इसलिए गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान देना सर्वोचित है।
(ख) दयालु, सहानुभूति, आत्मविश्वासी, उदारता, धैर्य, सत्य एवं मृदुभाषी, करुणा, ईमानदारी, सहनशीलता तथा निःस्वार्थता जैसी विशेषताएँ मनुष्य में होनी चाहिए ।
(ग) मैं मानता हूँ कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वतः पर भी पड़ता है। दरअसल कुछ महीने पहले मेरे स्कूल की तरफ से बच्चों को पिकनिक पर ले जाया गया था। उसके लिए बड़ों की अनुमति अनिवार्य थी । मेरे दादा जी बहुत उग्र और क्रोधी स्वभाव के हैं। उनसे अनुमति माँगना बहुत कठिन था।
माँ ने समझाया कि उनसे प्रेस से अनुमति ले लो। मैंने भी किसी तरह हिम्मत की और बड़े ही प्रेम एवं शालीनता के साथ अनुमति माँगी। उन्होंने हँस कर कहा कि इतने प्रेम से आज्ञा माँग रहे हो तो मैं कैसे मना कर सकता हूँ? इस प्रकार मीठी वाणी और सुंदर शब्दों का जादू चल गया और मुझे आज्ञा मिल गई।
(घ) हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का बहुत प्रभाव पड़ता है। इस बात का जीता जागता उदाहरण मैं स्वयं हूँ। मैं शुरु से ही पढ़ने में अच्छा रहा हूँ। किंतु जब मैं कक्षा छठी में गया तो मेरी मित्रता हमारी कक्षा में आए नए लड़के से हो गई। उसका मानना था कि ज्यादा पढ़कर क्या करना है, पास ही तो होना है? यह सोचकर वह पूरा दिन मौज- मस्ती करता रहता।
मैं भी उसके साथ रह कर ऐसे ही विचारों वाला हो गया। इन विचारों ने मेरे कार्यों पर प्रभाव डाला और मैं भी पढ़ाई से जी चुराने लग गया। परिणामस्वरूप, मेरे अंक बहुत ही कम आए । मुझे बहुत लज्जा महसूस हुई। मेरी माँ ने भी मुझे समझाया कि कोई बात नहीं अब फिर से अच्छी तरह से पढ़ाई में मन लगाओ और ऐसे लड़कों की संगति मत करो। उस दिन से लेकर मैंने सदैव अच्छे बच्चों के साथ ही मेल रखा और अब पुन: मेरी गिनती कक्षा के अच्छे बच्चों में होती है।
दोहे की रचना

“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप ।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप ।।”
इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों के दो-दो भाग दिखाई दे रहे है। इन चारों भागों का पहला शब्द है ‘अति’। इस कारण इस दोहे में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न हो गया है। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी कई विशेषताएँ दिखाई देंगी, जैसे- दोहों की प्रत्येक पंक्ति को बोलने में एक समान समय लगता है। अपने-अपने समूह में मिलकर पाठ में लिए गए दोहों की विशेषताओं की सूची बनाइए ।
(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें –
प्रश्न 1.
एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले (जैसे- राजा, रस्सी, रात) दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।
उत्तर:
(क) गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय ।
(ख) निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
(ग) साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय ।
(घ) जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।
(ङ) ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय ।
प्रश्न 2.
एक शब्द एक साथ दो बार आया है। (जैसे- बार-बार)
उत्तर:
सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय ।।
प्रश्न 3.
लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है (जैसे- जल, जाल) एक ही पंक्ति में आए हैं।
उत्तर:
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप ।।
प्रश्न 4.
एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों (जैसे- अच्छा-बुरा) का प्रयोग किया गया है।
उत्तर:
(क) साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।
(ख) अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
(ग) औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय ||
प्रश्न 5.
किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है। (जैसे- दूध जैसा सफेद)
उत्तर:
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
प्रश्न 6.
किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है। (जैसे—मुख चंद्र है)
उत्तर:
कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
प्रश्न 7.
किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है। (जैसे- ‘चुप’ के स्थान पर ‘चूप ‘)
उत्तर:
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय ।
प्रश्न 8.
उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।
उत्तर:
(क) बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।
(ख) निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय ।।
(ग) साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार सार को गहि रहे थोथा देइ उड़ाय।।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी समूह की सूची को सबके साथ साझा करें।
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय।”
- यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों ?
- यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?
उत्तर:
- मैं अपने गुरु के चरणों को पहले नमन करता क्योंकि उन्हीं के ज्ञान एवं मार्गदर्शन से मुझे ईश्वर के दर्शन हुए होते।
- संसार में ज्ञान का प्रकाश कभी नहीं फैलता और ईश्वर प्राप्ति भी संभव न होती ।
(ख) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप ।”
- यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है ?
- यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं?
- आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?
उत्तर:
- अधिक बोलने वाले व्यक्ति की बात का लोगों पर कम असर पड़ता है और कम बोलने वाले को लोग संकोची और डरपोक समझते हैं।
- यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक हो तो फसलें बर्बाद हो जाती हैं, बाढ़ आ जाती है तथा जीवन तहस-नहस हो जाता है। इसी तरह अगर वर्षा आवश्यकता से कम हो तो अकाल पड़ जाता है लोग भूख-प्यास से दम तोड़ने लगते हैं।
- आँखें खराब हो जाती हैं। इससे स्वास्थ्य संबंधी अनेकों अन्य समस्याएँ भी हो जाती हैं जैसे- सिरदर्द, नींद की समस्या, तनाव, सामाजिक अलगाव और अवसाद आदि। इसके अलावा कक्षा में खराब शैक्षणिक प्रदर्शन और समय की बर्बादी भी होती है।
(ग) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।”
- झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
- कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?
उत्तर:
- झूठ बोलने पर हम लोगों का भरोसा खो सकते हैं। हमें समाज में झूठ पकड़े जाने पर शर्मिन्दगी उठानी पड़ सकती है और हमारा आत्मसम्मान खतरे में पड़ सकता है।
- मैं जाकर बड़ी शालीनता के साथ उन्हें बता दूँगा कि उन्होंने मुझे गलती से उस प्रश्न के उत्तर के अंक दे दिए हैं जो गलत था।
(घ) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।”
- यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?
- क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो ? अनुमान लगाइए ।
उत्तर:
- सभी एक दूसरे की बात को बड़े ध्यान से सुनेंगे और सबका मन प्रसन्न एवं शांत रहेगा। लोग एक-दूसरे से प्रभावित होंगे तथा एक-दूसरे के असंभव कार्य को भी संभव बनाने का भरपूर प्रयत्न करेंगे। प्रेम एवं भाईचारा बढ़ेगा । हमारे संबंध सुदृढ़ होंगे।
- मेरे अनुमान में हम मधुर वाणी से किसी भी परिस्थिति पर विजय पा सकते हैं। ऐसी कोई परिस्थिति नहीं हो सकती जहाँ कटु वचन बोलना : आवश्यक हो ।
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(ङ) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।”
- यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने’ का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएँगे?
- खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं। वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? बताइए।
- आप अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका (मॉनीटर) चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे ?
उत्तर:
- मैं उसे समझाऊँगा कि खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है किंतु उसकी छाया एवं फल थके राहगीर को आराम नही दे पाते ठीक वैसे ही यदि आप बहुत बड़े बन गए हैं किंतु आपका बड़प्पन किसी के काम नहीं आया तो आपका बड़प्पन व्यर्थ है। आपको उदार बनना चाहिए।
- खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष भी अनेक प्रकार से उपयोगी होते हैं। खजूर फल, लकड़ी और अन्य उपयोगी चीजों के लिए जाना जाता है। नारियल का फल, पानी और तेल अत्यंत उपयोगी होते हैं।
- अनुशासनप्रिय, समय का पाबंद, सत्यवादी, ईमानदार तथा मेहनती।
(च) “ निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।”
- यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा ?
- यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा ?
उत्तर:
- मैं अपनी गलतियाँ जानकर उन्हें सुधारने का प्रयत्न करूँगा ताकि एक अच्छा इंसान बन सकूँ।
- समाज में सुधार की संभावना नहीं बचेगी। जो जैसा है, वह वैसा ही रहेगा।
(छ) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।”
- कल्पना कीजिए कि आपके पास ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएँगे?
- यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर:
- अगर मेरे पास सूप जैसी विशेषता हो तो मैं अपने अंदर प्रेम, ईमानदारी, सच्चाई, उदारता तथा अन्य सद्गुणों को अपनाऊँगा तथा समाज ‘ में अपनी जगह बना पाऊँगा ।
- कोई भी हमें मूर्ख बना पाएगा। हमारा फायदा भी उठा पाएगा।
(ज) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।’
- यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों?
- संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर:
- यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो मैं उसे अपने दादा-दादी के पास शिमला ले जाना चाहता। मैं अपने माँ-पापा के साथ दिल्ली में रहता हूँ और यहाँ काफी प्रदूषण है। शिमला का प्राकृतिक सौंदर्य और साफ-सुथरा वातावरण मेरे मन को बहुत भाता है।
- संगति का हमारे जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। अच्छी संगति से हम महानता की ओर बढ़ते हैं और बुरी संगति से हमारा पतन हो जाता है। जैसे- बारिश की एक बूँद मिट्टी में गिरती है तो अपना अस्तित्व खो देती है किंतु वही बूँद सीप में गिर कर मोती बन जाती हैं।
वाद-विवाद
“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप ।।”

(क) इस दोहे का आज के समय में क्या महत्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और दूसरे समूह के साथी इसके विपक्ष में बोलेंगे। एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।
उत्तर:
अध्यापक अपनी कक्षा में इस गतिविधि को छात्रों द्वारा करवाए।
(ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करेंगे, जैसे-
पक्ष-वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।
विपक्ष-अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है।
उत्तर:
पक्ष- ‘वाणी पर संयम रखना आवश्यक है ।’
मनुष्य को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए। वाणी किसी को राजा बना देती है, तो किसी को रंक | जिसकी वाणी सही नहीं होती है लोग उसे सम्मान नहीं देते हैं। हमें आवश्यकता से अधिक नहीं बोलना चाहिए। अपने शब्दों को सीमित रखना चाहिए तथा भावनाओं को भी नियंत्रित रखना चाहिए।
ऐसा नहीं बोलना चाहिए जिससे किसी को ठेस पहुँचे। हमें भूलना नहीं चाहिए कि वाणी के कारण ही महाभारत का युद्ध हुआ था। जो भी बोलो, सोच समझ कर बोलो। वाणी में इतनी ताकत होती है कि इसके दम पर मानव सारी दुनिया में अपना नाम कमा सकता है।
विपक्ष – ‘अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है । ‘मेरा मानना है कि अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं हैं। कभी-कभी चुप रहना आवश्यक या फायदेमंद हो सकता है लेकिन चुप रहना कई समस्याओं का कारण भी बन सकता है। अत्यधिक मौन रहने से अन्याय और उत्पीड़न को बढ़ावा मिलता है। जब कोई व्यक्ति अन्याय कर रहा हो और हम चुप रहें तो यह उसे प्रोत्साहित करने जैसा है।
अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए। समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी बोलना ज़रूरी है। आत्म-अभिव्यक्ति अर्थात् अपनी बात कहने का अधिकार हम सबके पास है। अत्यधिक चुप रहने से हम अपनी भावनाओं, विचारों एवं जरूरतों को व्यक्त करने से भी वंचित रह जाएँगे।
(ग) पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तर्कों की सूची अपनी लेखन – पुस्तिका में लिख लीजिए ।
उत्तर:
विद्यार्थी अपनी लेखन – पुस्तिका में लिख लीजिए ।
शब्द से जुड़े शब्द
प्रश्न – नीचे दिए गए स्थानों में कबीर से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए-

उत्तर:
गुरु, संगति, निंदक, पंछी, गोविंद, मन
दोहे और कहावतें
“कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय ।।”
इस दोहे को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह बात तो हमने पहले भी अनेक बार सुनी है। यह दोहा इतना अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय है कि इसकी दूसरी पंक्ति लोगों के बीच कहावत – ‘जैसा संग वैसा रंग’ (व्यक्ति जिस संगति में रहता है, वैसा ही उसका व्यवहार और स्वभाव बन जाता है ।) की तरह प्रयुक्त होती है। कहावतें ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें लोग अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। इसमें सामान्यतः जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्षेप में बता दिया जाता है।
उत्तर:
- अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए ।
- घर की मुर्गी दाल बराबर – गोपाल के पिता स्वयं ही एक उच्च कोटि के अध्यापक हैं, परंतु फिर भी गोपाल किसी और से ट्यूशन पढ़ता है। इसे कहते हैं कि घर की मुर्गी दाल बराबर ।
- घर का भेदी लंका ढाए – लुटेरों का चोरी किए सामान के बँटवारे पर ऐसा विवाद हुआ कि एक लुटेरे ने पुलिस को बुला कर सारा माल पकड़वा दिया। सच कहते हैं कि घर का भेदी लंका ढाए ।
- जिसकी लाठी उसकी भैंस- सरपंच ने पहले तो रमेश की जमीन हड़प ली फिर उसे चोरी के झूठे दोष में अंदर करवा दिया। सच कहते हैं जिसकी लाठी उसकी भैंस ।
- अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत- वसुधा पहले तो पढ़ी नहीं । कम अंक आने पर रोने लगी तो पिताजी ने यही कहा अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।
सबकी प्रस्तुति
पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए-
- गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में ।
- भाव – नृत्य प्रस्तुति ।
- कविता पाठ करना ।
- संगीत के साथ प्रस्तुत करना ।
- अभिनय करना, जैसे एक दोस्त गुस्से में आकर कुछ गलत कह देता है लेकिन दूसरा दोस्त उसे समझाता है कि मधुर भाषा का कितना प्रभाव पड़ता है। (ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय ।)
उत्तर:
विद्यार्थी अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में कक्षा में करें।
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पाठ से आगे प्रश्न- अभ्यास
(पृष्ठ 71-74)
आपकी बात
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए ।
उत्तर:
मेरी माँ ने मेरे जीवन में मुझे सदा सही दिशा दिखाई है। वह एक स्कूल में प्रिंसीपल हैं। जब भी मैं किसी भी चीज को लेकर असमंजस में होती हूँ तो वह तुरंत मुझे उस उलझन से निकाल देती हैं। वह मुझे सदैव प्रोत्साहित करती हैं।
(ख) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।” क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है जिनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो ? उस अनुभव को साझा कीजिए ।
उत्तर:
मुझे मेरी बड़ी बहन ने मेरी एक कमी के बारे में बताया था कि मुझे बहुत आदत है जब भी कोई दो व्यक्ति बात कर रहे होते हैं, तो बिना बात जाने मैं उस पर अपनी राय देने लग जाती हूँ। मुझे इस आदत को सुधारना चाहिए। मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मैंने उस पर ध्यान देना शुरू किया। देखते ही देखते मैंने अपनी इस गलत आदत को अपने से दूर कर दिया।
(ग) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे-मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।
उत्तर:
हमारी संगति हमारे विचारों और आदतों और व्यवहारों को बहुत प्रभावित करती है। मेरी माँ चाहती थी कि मैं गिटार बजाना सीखूँ लेकिन मुझे अच्छा नहीं लगता था। फिर मेरी दोस्ती रॉकी से हुई । वह बहुत बढ़िया गिटार बजाता था। उसके साथ रह रह कर मुझे भी गिटार बजाना अच्छा लगने लगा।
सृजन
(क) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप ।”
इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए जिसमें किसी व्यक्ति ने कंठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। (संकेत- किसी खेल में आपकी टीम द्वारा नियमों के उल्लंघन का आपके द्वारा विरोध किया जाना ।)
उत्तर:
कहानी – सोमवार का दिन था। रवि और सार्थक दोनों ही अपने-अपने स्कूल की फुटबॉल टीम के मंजे हुए कप्तान थे। रवि आर्य पब्लिक स्कूल में था और मैं भी इसी स्कूल में पढ़ता था। सार्थक विवेकानन्द पब्लिक स्कूल का विद्यार्थी था । हमारे दोनों स्कूल में फुटबॉल के मैच का मुकाबला था। मैदान खचाखच भरा हुआ था। हमारी टीम के साथ-साथ सार्थक की टीम भी बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। आखिरकार मैच ड्रा हो गया। रेफरी (निर्णायक) ने विजेता निर्धारित करने के लिए पेनेल्टी शूटआउट का उपयोग किया। इसके लिए रवि को हमारी टीम से भेजा गया।
एक निर्धारित लाइन के पीछे फुटबॉल रखकर रवि को गोल करना था। वह पूरी तरह से तैयार था। इसी बीच रेफरी को किसी का फोन आ गया और उनका ध्यान भटक गया। इतने में रवि ने फुटबॉल लाइन से आगे रखकर बड़ी चालाकी से धोखे के साथ गोल कर दिया। सब खुश हो गए कि हमारी टीम जीत गई। किसी का ध्यान उसकी धोखेबाजी पर नहीं गया। यह बात मुझे पसंद नहीं आई कि खेल के नियमों का उल्लंघन करके और झूठ से ट्राफी जीती जाए।
मैंने मन ही मन फैसला किया और अपने प्रिंसीपल सर और निर्णायक (रेफरी) जी को बताया। उन्होंने मेरी भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा सार्थक की टीम को विजयी घोषित किया। मुझे हृदय से प्रसन्नता थी कि मैंने सच बोल कर सही को विजयी बनवाया।
(ख) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।
इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।
उत्तर-
मैंने अपने प्रिय शिक्षक यशपाल मेहता जी के साथ साक्षात्कार किया तथा उनके योगदान पर एक निबंध लिखने जा रहा हूँ।
शिक्षक हमारे जीवन में अत्यधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी प्रकार यशपाल सर केवल किताबों से ज्ञान नहीं देते हैं बल्कि हमें सही जीवन जीने के सही तरीके, सही मूल्यों और आदर्शों की भी शिक्षा देते हैं। वह न केवल पढ़ाई बल्कि व्यक्तिगत विकास, आत्मविश्वास और अनुशासन में भी हमारी मदद करते हैं। यशपाल जी हमें अंग्रेजी विषय पढ़ाते हैं ।
पहले मुझे अंग्रेज़ी विषय एक आँख नहीं भाता था पर अब यह मेरा पसंदीदा विषय है। उनका पढ़ाया पाठ मैं कभी नहीं भूलता। उनका बाहरी व्यक्तित्व जितना सुंदर और आकर्षक है उतना ही उनका स्वभाव अच्छा और मिलनसार है। वे गरीब बच्चों को मुफ़्त में अंग्रेजी पढ़ाते हैं। सभी विद्यार्थियों के साथ समान व्यवहार करते हैं । वे मेरी प्रेरणा हैं। मुझे उनके जैसे शिक्षक से पढ़ने का सौभाग्य मिला, यह मेरी खुशकिस्मती है।
कबीर हमारे समय में
(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए ।
(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
(क) कबीर जी इन विषयों पर कविता लिख सकते हैं- इंटरनेट, मोबाइल, साइबर सुरक्षा और अवसाद (डिप्रेशन)
(ख)
- इंटरनेट – आजकल अगर इंटरनेट न हो तो ऑफिस में कोई भी कार्य संभव नहीं हो पाएगा।
इंटरनेट हमारी उन्नति और पतन दोनों का ही कारण बन सकता है। - मोबाइल – मोबाइल का प्रयोग करके आप दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे अपनों से बात कर सकते हैं।
मोबाइल का ज्यादा प्रयोग करके लोग अपना समय भी बर्बाद करते हैं। जितना जरूरी हो मोबाइल उतना ही चलाना चाहिए । - साइबर सुरक्षा – आज के दौर में यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण है जिससे हमारा कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा सुरक्षित रहता है।
यह हमारी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जानकारी भी सुरक्षित रखता है जैसे- बैंक विवरण और पासवर्ड आदि । - अवसाद (डिप्रेशन) – आजकल अवसाद बहुत अधिक मात्रा में लोगों को अपना शिकार बनाए हुए है। यह मानसिक स्थिति है जो लगातार उदासी और चीज़ों में रुचि की कमी का कारण बनती है।
साइबर सुरक्षा और दोहे
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में विचार-विमर्श कीजिए और साझा कीजिए-
(क) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। ” इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या – क्या संकट हो सकते हैं?
उत्तर:
इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के बहुत से संकट हो सकते हैं। जैसे- हमारी व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग, वित्तीय धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न, स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव और बिना सत्यापित जानकारी के लोग गलत सूचनाओं के प्रसार में योगदान करके समाज में भ्रम और अविश्वास फैलाते हैं।
(ख) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय । ” किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को ‘सूप’ की तरह छानने की आवश्यकता क्यों है ? कैसे तय करें कि कौन – सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक ?
उत्तर:
हमें किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को तभी उपयोगी मानना चाहिए अगर वो सत्यापित है और सरकार द्वारा उसकी सूचना हम तक पहुँचाई गई है। सबसे पहले जानकारी के स्रोत की विश्वसनीयता की जाँच करनी चाहिए। यदि प्रतिष्ठित संगठन या व्यक्ति द्वारा है तो उपयोगी है अन्यथा हानिकारक है।
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आज के समय में
नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं? घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए-
(क) अमित का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वह गलत संगति में चला गया। कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ में आया- ‘संगति का असर जीवन पर पड़ता है।
उत्तर:
कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।
(ख) एक विद्यार्थी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा- ” हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो।”
उत्तर:
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय ।
सार सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ाय ।।
(ग) आपका एक मित्र आपकी किसी गलत बात पर आपकी आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते हैं, लेकिन फिर आपने सोचा – ” आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है, मुझे इन बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।”
उत्तर:
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय ।।
(घ) रीमा ने अपने गुस्से में सहकर्मी को बुरा-भला कह दिया, जिससे वातावरण बिगड़ गया। बाद में उसने समझा कि अगर वह शांति से बात करती तो समस्या हल हो जाती।
उत्तर:
ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय ।।
(ङ) कक्षा में मोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको परेशान कर दिया, जबकि रमेश बिल्कुल चुप रहा। गुरुजी ने कहा – “बोलचाल में संतुलन आवश्यक है, न अधिक बोलो, न अधिक चुप रहो।”
उत्तर:
अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप ।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप
(च) सुरेश को जब ‘प्रतिभा सम्मान’ मिला तो उसने कहा- “इसमें मेरे परिश्रम के साथ मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है ।’
उत्तर:
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।
खोजबीन के लिए
अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजनों, गीतों, लोकगीतों को खोजिए और सुनिए । किसी एक गीत को अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए ।
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कबीर के बारे में और जान – समझ सकते हैं-
- संत कबीर
https : // w w w.youtube. com / watch?v = F G MEpPJJ Qmk& t = 2 5 9 s & a b_channel=NCERTOFFICIAL - कबीर वाणी
https://www.youtube. com/watch?v=NCEIIugmw VO&t=13s&ab_hannel=NCERTOFFICIAL
https://www.youtube.com/watch?v=3Qsyn/vp62Y &t=8s&ab_channel=NCERTOFFICIALchannel=NCERTOFFICIAL
https://www.youtube.com/watch?v=gnU7w-RH h yU&t=14s&ab_ channel=:NCERTOFFICIAL
- कबीर की साखियाँ
https://www.youtube.com/ watch?v=ngF88zX nfQ0&ab_channel=NCERTOFFICIAL - दोहे कबीर, रहीम, तुलसी
https://www.youtube.com/ watch?v = cnrj LCkggr4&t=12s&ab_ channel=NCERTOFFICIAL
NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 5 चिट्ठियों की अनूठी दुनिया (Old Syllabus)
प्रश्न-अभ्यास
Question 1:
पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश क्यों नहीं दे सकता?
Solution:
पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश नहीं दे सकता क्योंकि फोन, एसएमएस द्वारा केवल कामकाजी बातों को संक्षिप्त रूप से व्यक्त कर सकते हैं। पत्रों द्वारा हम अपने मनोभावों को खुलकर व्यक्त कर सकते हैं। पत्रों से आत्मीयता झलकती है। इन्हें अनुसंधान का विषय भी बनाया जा सकता है। ये कई किताबों का आधार हैं। पत्र राजनीति, साहित्य तथा कला क्षेत्र में प्रगतिशील आंदोलन के कारण बन सकते हैं। यह क्षमता फोन या एसएमएस द्वारा दिए गए संदेश में नहीं।
Question 2:
पत्र को खत, कागद, उत्तरम्, जाबू, लेख, कडिद, पाती, चिट्ठी इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताइए।
Solution:
- खत – उर्दू
- कागद – कन्नड़
- उत्तरम् – तेलूगु
- जाबू – तेलूगु
- लेख – तेलूगु
- कडिद – तमिल
- पाती – हिन्दी
- चिट्ठी – हिन्दी
- पत्र – संस्कृत
Question 3:
पत्र लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए? लिखिए।
Solution:
पत्र लेखन की कला को विकसित करने के लिए दुनिया के सभी देशों द्वारा पाठयक्रमों में पत्र लेखन का विषय शामिल किया गया। विश्व डाक संघ की ओर से 16 वर्ष से कम आयुवर्ग के बच्चों के लिए पत्र लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का कार्यक्रम सन् 1972 से शुरू किया गया।
Question 4:
पत्र धरोहर हो सकते हैं लेकिन एसएमएस क्यों नहीं? तर्क सहित अपना विचार लिखिए।
Solution:
पत्र व्यक्ति की स्वयं की हस्तलिपि में होते हैं, जो कि प्रियजन को अधिक संवेदित करते हैं। हम जितने चाहे उतने पत्रों को धरोहर के रूप में समेट कर रख सकते हैं जबकि एसएमएस को मोबाइल में सहेज कर रखने की क्षमता ज़्यादा समय तक नहीं होती है। एसएमएस को जल्द ही भुला दिया जाता है। पत्र देश, काल, समाज को जानने का साधन रहा है। दुनिया के तमाम संग्रहालयों में जानी-मानी हस्तियों के पत्रों का अनूठा संकलन भी है।
Question 5:
क्या चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ले सकते हैं?
Solution:
पत्रों का चलन न कभी कम हुआ था, न कभी कम होगा। चिट्ठियों की जगह कोई नहीं ले सकता है। पत्र लेखन एक साहित्यिक कला है परन्तु फेक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल जैसे तकनीकी माध्यम केवल काम-काज के क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं। आज ये आवश्यकताओं में आते हैं फिर भी ये पत्र का स्थान नहीं ले सकते हैं।
Question 6:
किसी के लिए बिना टिकट सादे लिफ़ाफ़े पर सही पता लिखकर पत्र बैरंग भेजने पर कौन-सी कठिनाई आ सकती है? पता कीजिए।
Solution:
बिना टिकट सादे लिफ़ाफ़े पर सही पता लिखकर पत्र बैरंग भेजने पर पत्र को पाने वाले व्यक्ति को टिकट की धनराशि जुर्माने के रूप में देनी होगी।
Question 7:
पिन कोड भी संख्याओं में लिखा गया एक पता है, कैसे?
Solution:
पिन कोड किसी खास क्षेत्र को संबोधित करता है कि यह पत्र किस राज्य के किस क्षेत्र का है। इसके साथ व्यक्ति का नाम और नंबर आदि भी लिखना पड़ता है।
पिन कोड का पूरा रूप है पोस्टल इंडेक्स नंबर। यह 6 अंको का होता है। हर एक का खास स्थानीय अर्थ होता है, जैसे – १ अंक राज्य, २ और ३ अंक उपक्षेत्र, अन्य अंक क्रमशः डाकघर आदि के होते है। इस प्रकार पिन कोड भी संख्याओं में लिखा गया एक पता है।
Question 8:
ऐसा क्यों होता था कि महात्मा गांधी को दुनिया भर से पत्र ‘महात्मा गांधी-इंडिया’ पता लिखकर आते थे?
Solution:
महात्मा गांधी को दुनिया भर से पत्र ‘महात्मा गांधी-इंडिया’ पता लिखकर आते थे क्योंकि महात्मा गांधी अपने समय के सर्वाधिक लोकप्रिय व प्रसिद्ध व्यक्ति थे। वे भारत गौरव थे। गाँधी जी देश के किस भाग में रह रहे हैं यह देशवासियो को पता रहता था। अत: उनको पत्र अवश्य मिल जाता था।
भाषा की बात
Question 1:
किसी प्रयोजन विशेष से संबंधित शब्दों के साथ पत्र शब्द जोड़ने से कुछ नए शब्द बनते हैं, जैसे – प्रशस्ति पत्र, समाचार पत्र। आप भी पत्र के योग से बननेवाले दस शब्द लिखिए।
Solution:
- प्रार्थना पत्र
- मासिक पत्र
- छः मासिक पत्र
- वार्षिक पत्र
- दैनिक पत्र
- साप्ताहिक पत्र
- पाक्षिक पत्र
- सरकारी पत्र
- साहित्यिक पत्र
- निमंत्रण पत्र
Question 2:
‘व्यापारिक’ शब्द व्यापार के साथ ‘इक’ प्रत्यय के योग से बना है। इक प्रत्यय के योग से बनने वाले शब्दों को अपनी पाठ्यपुस्तक से खोजकर लिखिए।
Solution:
इक प्रत्यय के योग से बनने वाले शब्द –
- स्वाभाविक
- साहित्यिक
- व्यवसायिक
- दैनिक
- प्राकृतिक
- जैविक
- प्रारंभिक
- पौराणिक
- ऐतिहासिक
- सांस्कृतिक
Question 3:
दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं;जैसे – रवीन्द्र = रवि + इन्द्र। इस संधि में इ + इ = ई हुई है। इसे दीर्घ संधि कहते हैं। दीर्घ स्वर संधि के और उदाहरण खोजकर लिखिए। मुख्य रूप से स्वर संधियाँ चार प्रकार की मानी गई हैं – दीर्घ, गुण, वृद्धि और यण।
ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, आ आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते हैं, इसी कारण इस संधि को दीर्घ संधि कहते हैं;जैसे – संग्रह + आलय = संग्रहालय, महा + आत्मा = महात्मा।
इस प्रकार के कम-से-कम दस उदाहरण खोजकर लिखिए और अपनी शिक्षिका/शिक्षक को दिखाइए।
Solution:
- गुरूपदेश = गुरू + उपदेश (उ + उ)
- संग्रहालय = संग्रह + आलय (अ + आ)
- हिमालय = हिम + आलय (अ + आ)
- भोजनालय = भोजन + आलय (अ + आ)
- स्वेच्छा= सु + इच्छा( उ + इ)
- अनुमति = अनु + मति (उ + अ)
- रवीन्द्र = रवि + इंद्र (इ + इ)
- विद्यालय = विद्या + आलय (आ + आ)
- सूर्य + उदय = सूर्योदय (अ + उ)
- सदा + एव = सदैव (आ + ए)